Brihad Vakahada Chakram (बृहदवकहडाचक्रम्)

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Pt. Shiv Prasad Sharma - Bharatiya Vidya Sansthan

Brihad Vakahada Chakram (बृहदवकहडाचक्रम्)

बृहदवकहडाचक्रम् (Brihad Vakahada Chakram) जहाँ ‘वेदोऽखिलो धर्ममूलम्’ यह सर्वमान्य सिद्धान्त है वहीं उसी वेद-विहित धर्म को देखने के लिये ‘ज्योतिष चक्षुरुच्यते’ यह भी अत्याज्य सिद्धान्त है। व्यवहार जगत को सही-गलत, उचित-अनुचित समझने के लिये चक्षु की ही सर्वाधिक उपयोगिता है। आँखें नहीं तो कुछ भी नहीं। अतः उत्तम अङ्ग आँख से ही सब कुछ देखना सम्भव है इसलिये यह छोटी सी पुस्तक ‘बृहदवकहडाचक्रम्’ के सहारे मुहूर्त शोधन सम्बन्धी समस्त कार्य साधारणतया सम्पन्न किया जा सकेगा। मुहूर्त बताने के कई साधन हैं, जैसे
         १. ग्रह, नक्षत्र, भोग आदि पञ्चाङ्गों द्वारा है। २. स्वर-साधन द्वारा। ३. प्रश्न द्वारा।
इन तीनों साधनों में पञ्चाङ्ग की उपयोगिता सिद्ध होती है।

Author : Pt. Shiv Prasad Sharma

Publication : Bharatiya Vidya Sansthan

Language : Hindi

Edition ; 1st 2008

Pages : 88

Cover : Paper Back

ISBN :        --

Size : 12 x 1 x 18 ( l x w x h )

Weight : 500gm

Item Code : BVS 0027

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